मेरा हिन्दी ब्लॉग

Sunday, May 08, 2005

समेस्टर का अन्त

यह समेस्टर पूरा होना वाला है। मुझे तीन अौर निबन्द लिखने चाहिये अौर एक परिक्षा देने चाहिये (हिन्दी की परिक्षा)। तब गर्मिया की चुत्ती शरू होगी!

Sunday, May 01, 2005

वॉशिंटण बटख़

वाइट् हाउस् बतख्

एक बतख़ ने वाइट् हाउस् के पास घोंसला बनाया है अपने अंडों के लिये। राष्ट्रपति की रक्षा करने के अलावा, सीक्रट सर्विस ने बाड़े को बनाया और बतख़ और उसके अंडों को रक्षा करने लगा। कल बच्चे अंडे से निकला दिये!

Saturday, April 02, 2005

मेरा कुत्ता

शयद अाप जानना चाहता है कि इस वेब साइट का पता "हिन्दी सेमी" का क्या मतलब है। सेमी मेरे कुत्ता का नाम है। वह बहुत अच्छा कुत्ता है। वह एक बीगल है--स्नूपी जैसे। वह पाँच साल का कुत्ता है। मुझसे मिलने से पहले, सेमी का जीवन ज़यादा मुशकिल है। वह एक प्रयोग-शाला का कुत्ता था। वह वहाँ रहता था अनुसँधानात्मक अध्ययन के लिये। उसके जीवन के पहले दो साल के लिये, वह प्रयोग शाला के बाहर कभी नहीं गया। लेकिन मुझे लगता है कि आज वह प्रयोग शाला को याद नहीं करता है और वह बहुत खुश कुत्ता है।

Friday, April 01, 2005

एक कहानी

यह एक छोटी कहानी जो मैने दो साल पहले लिखी।


भोजू का दिन

बड़े सवेरे भोजू की नींद खुली और चौंक गया। भोजू एक छोटा लड़का था। वह छ: साल का था। वह थोड़ा नटखट था अौर उसकी अांखें सर्वदा चमकती रहती थीं।

भौजू अपनी मां को चौक में देखकर उसकी तरफ भागा। उसने मां की साड़ी खींची। मां मुस्कराती फ़र्श झाड़ू से साफ़ कर रही थी। भोजू ने मां से कहा "आज मैं राजू के साथ खेलूँगा।"

"ठीक है बेटा। लेकिन पहले तुझे ऐक-दो रोटी खानी चाहिये।"

भोजू ने दो रोटियाँ लेकर अपना मुँह पूरा भरा और बाहर दौड़ा। उसका दोस्त राजू खेत के बग़ल में चल रहा था। भोजू अपने दोस्त को देखकर बड़ा खुश था। "हे राजू! मैं नदी में खेलना चाहता हूँ। कई मछलियों को पखरेंगे। चलो।"

राजू ने कहा--"लेकिन हम दोनों मछुआरे नहीं हैं। हमारे पास कोई मछली पकड़ने का डँडा नहीं हैं।"

भोजू ने एक क्षण इस के बारे में सोचकर कहा "कोई बात नहीं। हम भालू की तरह अपने हाथों से मचली पकड़ेंगे।

"अरे वाह!" राजू ने कहा। "हम भालू बनेंगे! चलो।"

दोनों छोटे लड़के नदी की ओर चल गए। नदी पहुँचकर वे किनारे पर बैठ गए। भोजू चाहता था कि वह एक बड़ी मछली पकड़े। अगर वह मछली पकड़ेगा तो उसका परिवार बड़ा भोजन कर सकेगा और उसकी माँ खुश होगी।

लेकिन मछली नहीं आई। लड़के दिन भर प्रतीक्षा करते रहे। वे पानी में चले लेकिन को मछली नहीं दिखी।

अँतत: दे बिना मछली पकड़े घर लौटे। जब भोजू अपने घर पर पहुँचा रसोईघर मे अच्छी गँध आ रही थी। माँ ने कहा "अरे भोजू, खाना खाओ!"

माँ बाज़ार गयी थी और उन्होंने मछली खरीदी। भोजू बहुत ख़ुश था और वह जल्दी से मछली खाने लगा। फिर उसने सोचा "लेकिन राजू को भी भूख लगती होगी।" उसने बाहर जाकर राजू को बूलाया। राजू आया और दोनों लड़कों ने बड़ा भोजन किया।

यूनिकोड हिन्दी फोण्ट

मैंने अपने कम्प्यूटर पर नया सोफ्ट-वेर डाल दिया, तो मैं अभी यूनिकोड का हिन्दी फोण्ट ज्यादा ठीक से देख सकता हूँ। लेकिन फिर भी कुछ छोटी फोण्ट की गलितयाँ होती हैं। मैं उसको ठीक करने की कोिशश करूँगा।

Thursday, March 31, 2005

पहला पोस्त

यह मेरा िहन्दी ब्लाग अौर यह मेरा पहला पोस्ट।